आज हिन्दी-दिवस है, आज के दिन बेचारी हिन्दी सौ सौ आँसू बहा रही होगी, और हम देशवासी पुरे साल में मात्र एक दिन उसे याद कर इतिश्री कर देते हैं। हिदी किसी प्रदेश या देश तक सीमित नहीं रही। भारत से बाहर फीजी, मारीशस, गायना, सूरीनाम, त्रिनिदाद, अरब, अमीरात, इग्लैंड, अमेरिका, कनाडा आदि कई देशों में लोग इसे दैनिक व्यवहार में लाते है। तकनीकी विकास के चलते आज हिदी में एसएमएस, ईमेल आदि सभी सुविधाएं उपलब्ध है। इटरनेट पर भी हिदी का व्यवहार बढ़ा है। हिंदी ने विश्वभाषा का रूप धारण कर लिया है।
हिदी को लेकर एक बात अक्सर कही जाती है कि गैर हिदी भाषी क्षेत्रों विशेषकर दक्षिण भारत में हिदी का विरोध है। यह बात पूर्णत: सही नहीं है। गैर हिदी भाषी प्रदेशों में हिदी का विरोध हुआ तो वह राजनीति प्रेरित था।
और यदि अंग्रेजी ही राजभाषा के काबिल है तो फिर हिदी पखवाड़ा, हिदी सप्ताह और हिंदी दिवस जैसे ढोंग करने की क्या जरूरत है? क्यों मंत्रालयों और विभागों में हिदी अधिकारी नियुक्त कर करोड़ों रुपये बरबाद किए जा रहे है? क्यों हिदी अकादमी, हिदी विश्वविद्यालय खोले जा रहे है? जो भाषा इस देश के काबिल ही नहीं है और जिसमें इस देश की कार्यपालिका, न्याय पालिका और विधायिका काम नहीं कर सकती है, उसके प्रचार-प्रचार के लिए क्यों देश की धन, श्रम और समय नष्ट किया जा रहा है?
भाषा के मुद्दे को और टालने की बजाए, तुरत समाधान किया जाना चाहिए। इसके लिए दृढ़ इच्छा शक्ति की जरूरत है और इसका राजनेताओं में अभाव है। इसलिए इनसे अपेक्षा करना बेकार है। जब पूरे देश में आदोलन शुरू हुए, तभी आजादी मिल सकी। आज ऐसे ही देशव्यापी आदोलन की जरूरत है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि भाषा का मसला, आजादी से कम महत्वपूर्ण नहीं है। हिन्दी-दिवस की शुभकामनाएँ!
सही कह रहे हैं.
जवाब देंहटाएंहिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ.
कृप्या अपने किसी मित्र या परिवार के सदस्य का एक नया हिन्दी चिट्ठा शुरु करवा कर इस दिवस विशेष पर हिन्दी के प्रचार एवं प्रसार का संकल्प लिजिये.
हिन्दी-दिवस की शुभकामनाएँ.....!
जवाब देंहटाएंहिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ.
जवाब देंहटाएंब्लोगिंग जगत में आपका स्वागत है. आपको पढ़कर बहुत अच्छा लगा. सार्थक लेखन हेतु शुभकामनाएं. जारी रहें.
जवाब देंहटाएं---
Till 25-09-09 लेखक / लेखिका के रूप में ज्वाइन [उल्टा तीर] - होने वाली एक क्रान्ति!