आकूति


Click here for Myspace Layouts

शनिवार, 29 अगस्त 2009

झारखण्ड मे अकाल

सरकार के सौ दिन गुजर गए। चुनाव पूर्व दावे न पूरे होने थे न पूरे हुए। नरेगा मे 12 हजार करोड़ रुपये देने से क्या होना है,होगा वही जो अघिकारी चाहेंगे। वे अपना और अपने मातहतों का हिस्सा निकालने के लिये कितने छिद्र रखते हैं अगर वो देखना हो तो झारखण्ड आकर देखें। यहाँ के एक अधिकारी के झारखण्ड,दिल्ली एवं अन्य ठिकानो में परसों पडे छापों में C.B.I. को करोड़ों रुपये की चल अचल सम्पती मिली। आखीर ये सब आया कहाँ से।
एक बात और समाज के ये दीमक,अपनी चोरी छिपाने के लिये हर वर्ष हजारों टन अनाज वर्षा के जल में सडा कर लाखों टन पचा लेते हैं। मानसून की इस बेरूखी मे भी इनको अनाज सडाने की खातिर पानी मिल ही गया। कम से कम इस अकाल मे तो इनको भूखे गरीबों पर तरस आनी चाहीए थी सरकार भी अपनी आँकडों पर ही ईतिश्री मान लेती है। कम से कम जिम्मेवार पदाधिकारी पर कार्रवाई तो होनी ही चाहिये, लेकीन होता कुछ नहीं। होता ये है,कि अगले वर्ष फिर से वही कहानी दुहराई जाती है और आँकडों पर टीकी सरकार को आँकडे भेज दी जाती है।..... .
झारखण्ड में अभी राष्टपति शासन है,चुनाव भी जल्द होने हैं फिर भी अकाल राहत के नाम पर केवल घोषणाएँ ही की जा रही हैं,उन पर अमल नहीं हो रहा।